#खरबूजे_की_खेती: कम पैसे में मोटी कमाई करने का मौका#sangariakiaawaz#Melon_Farming: कोरोनाकाल में कई रोगों से बचाता है खरबूजा, खूब खाईए और अपने सेहत का ख्याल रखिए.. जानिए इसकी फसल कैसे लगाई जाती है और किसान कैसे कमा रहे हैंदेश के अलग अलग हिस्से में 6 महीने खरबूजे की खेती होती हैखरबूजा ईरान, अनाटोलिया और अरमीनिया का मूल है. खरबूजा विटामिन ए और विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत है. इसमें 90 फीसदी पानी और 9 फीसदी कार्बोहाइड्रेट होते हैं. भारत में खरबूजे उगाने वाली सब्जियों में राजस्थान,पंजाब, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश भी शामिल है.खरबूजा एक नकदी फसल है. फल पकते समय मौसम शुष्क तथा पछुआ हवा बहने से फलों में मिठास बढ़ जाती है. हवा में अधिक नमी होने से फल देरी से पकते है तथा रोग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है.कैसे करें खरबूजे की खेती#डा_अनूपकुमार #कृषि_विज्ञान_केन्द्र_संगरिया के निर्देशन मे नाथवाना के प्रगतिशील किसान #अनूज_पुनिया_9887522718 चक मे आजकल सब्जीयों के उत्पादन पर विशेष अनुसंधान के साथ का काम कर रहे है. कई तरह की सब्जियों और तरबूज और खरबूजे (#रेड_परी, #लायलपुरी )की फसल का उत्पादन कर रहे है #हार्टिकल्चर_विभाग के #विभागाध्यक्ष_डाक्टर_महावीर_कंस्वा की देखरेख में इस सारे प्रोजेक्ट को देख रहे हैं. खरबूजा अब एक नकदी फसल के रुप में की जा रही है.बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त है खरबूजे के लिए खरबूजे के लिए गर्मी का मौसम सबसे उपयुक्त है इसलिए इसे लगाने का समय है. जनवरी की शुरुआत से लेकर फरवरी के अंत तक इसकी बेल लगाई जाती है.जमीन हल्दी रेतिली हो और तापमान 22 से 40 डीग्री के बीच हो तो फसल उत्पादन भी अच्छा रहता है. अगर इस समय पछुआ हवा चलने लगे तो फल में और मिठास आ जाती है.देश के अलग अलग हिस्से में 6 महीने खरबूजे की खेती होती हैवहीं अलग अलग प्रदेश में अलग महीने में इसकी बुआई होती है दक्षिण भारत में तो अक्टूबर में फसल लगती है जबकि बिहार में दिसंबर और जनवरी में वहीं उत्तर भारत के दूसरे प्रदेशों में फरवरी तक लगाई जाती है.कौन सी किस्म है बेहतरअब तो समतल जमीनों पर भी खेती की जाती है. जहां तक नस्ल की बात है तो इसमें पूसा मधुरस, अर्का राहंस, काशी मधु, दुर्गापूरा मधु, पंजाब सुनही, गुजरात खरबूजा जैसे कई किस्म अपने देश में खेती की जा रही है. इसमें क्षेत्र विशेष की भूमि की गुणवत्ता को आधार मानकर किसान फसल लगा रहे हैं.राजस्थान, हरियाणा के किसान हजारों एकड़ में कर रहे हैं खरबूजे की खेतीराजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के संगरिया तहसील के नाथवाना मे आजकल खरबूजे के लिए महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बन गया है.कैसे लगाए जाते हैं खरबूजेफसलें हम दो बार लगाते हैं एक बार तो जनवरी के महीने में और दूसरे 15 फरवरी से एक 25 तक लगाते हैं.इसके पीछे यहीं कारण है कि दो महीने तक बाजार में हम अपनी उपज बेच सकें जनवरी में लगाई गई फसल अप्रैल में बाजार में आ जाती है,लेकिन फरवरी वाली मई की शुरुआत से लेकर पूरे महीने हमें आमदनी देती रहती है.अनूज पुनिया बताते हैं कि एक एकड़ में तीन से करीब क्यारी बनाते हैं हर क्यारी में बीज लगाते हैं या फिर दूसरे पारंपरिक तरीके से पौधे की लगाते हैं जैसे कलम विधि है.वहीं पानी की ज्यादा बचत हो इसके लिए मै अपनी फसल मंच विधि से लगाता हूूं वहीं हमारे यहां कई किसान ड्रीप विधि से फसल की पटवन करते हैं .शुरुआत में हमें 24 रुपये से 30 रुपये किलों के हिसाब कीमत मिलती हैहमारी फसल अप्रैल के पहले सप्ताह से कटनी शुरु हो जाती है इसका वजन एक किलोग्राम से डेढ दो किलोग्राम तक की हो जाता है..शुरुआत में हमे थोक में 24 से 30 रुपये किलोग्राम बेचते हैं.इसकी तुडाई एक खेत में 4 से 5 बार की जाती है. 1 सप्ताह से 15 दिनों में फसल तैयार होकर बाजार में पहुंच जाती है.एक एकड़ में 150 क्विंटल से 250 क्विंटल तरबूजे का उत्पादन हो जाता है यानी 5 लाख प्रति एकड़ के हिसाब माल बिक जाता और दो से ढाई लाख रुपये की कमाई हो जाती है.खरबूजे की खेती: कम पैसे में मोटी कमाई करने का मौका

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#संगरिया #किरण_गर्ग_चुनी_गई_एपेक्स_वुमन_क्लब_की_अध्यक्ष💐संगरिया की आवाज़-न्यूज़ एजेंसी बधाई 💐🌹💐क्लब की वार्षिक बैठक सम्पन्न- #संगरिया शहर की अग्रणी सामाजिक संस्था एपेक्स वुमन क्लब (रजि.) की वार्षिक सामान्य बैठक क्लब अध्यक्ष व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नीलम सोनी की अध्यक्षता में सदस्य नविता गोयल के घर पर हुई। बैठक में वार्षिक चुनाव सम्पन्न हुए जिसमें सर्वसम्मति से क्लब की सरंक्षक नीलम बंसल, अध्यक्ष किरण गर्ग, सचिव सुंदरी सोनी और कोषाध्यक्ष के पद पर ममता गर्ग का चयन किया गया। बैठक का प्रारंभ गणेश वंदना और प्रार्थना से हुआ। एपेक्स आइडियल्स स्वाति गुप्ता द्वारा पढ़ी गयी। नए पदाधिकारियों को शीघ्र ही समारोहपूर्वक पद व गोपनीयता की शपथ दिलवाई जाएगी। बैठक में गत वर्ष के कार्यों व भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा हुई। अध्यक्ष नीलम सोनी ने एपेक्स को इतनी ऊंचाइयों पर ले जाने का सारा श्रेय संस्था के सभी कर्मठ, डेडीकेटेड और सक्रिय सदस्यों को दिया, जिन्होंने निरंतर सेवा कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोषाध्यक्ष नीलम बंसल ने बताया कि निर्जला एकादशी को पानी के दान का अत्यंत महत्व है तथा क्लब द्वारा हर वर्ष की भांति इस बार भी 31 मई को निर्जला एकादशी के उपलक्ष्य पर शरबत व नींबू पानी की छबील लगाई जाएगी तथा क्लब के स्थायी प्रकल्प के रूप में अग्रसेन मार्किट में राहगीरों के लिए वाटर कूलर की स्थापना की जाएगी। बैठक का समापन राष्ट्रीय गान से हुआ। बैठक में नीलम सोनी, नीलम बंसल, किरण गर्ग, सुंदरी सोनी, ममता गर्ग, पायल जैन, स्वाति गुप्ता, रचना यादव, नीरू सोमानी, रिम्पी गर्ग, नविता गोयल, डॉ. जयश्री, पिंकी अग्रवाल, नीतू गर्ग आदि सदस्य उपस्थित थे।

#आर्थिक_सूझाव#सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है. #वैश्विक संकट के दौर में इसका भाव उछल जाता है. #पिछले एक साल में सोने में अच्छा उछाल आया है.#अक्षय_तृतीया (Akshaya Tritiya 2023) शनिवार, #22अप्रैल को मनाई जाएगी. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया को आने वाली अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ दिन माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि यह दिन हर तरह के हानिकारक प्रभाव से मुक्त होता है. इसलिए इस दिन कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले शुभ मुहूर्त पर विचार करने की भी आवश्यकता नहीं है होती है. अक्षय तृतीया के दिन सोना (Gold) खरीदना शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से घर में शांति और समृद्धि आती है. अगर आपका इरादा भी अक्षय तृतीया को सोना खरीदने का है, तो यह काम बेहिचक कर डालिए. इसका कारण यह है कि पिछले लंबे समय से सोना अन्य निवेश विकल्पों से बहुत ज्यादा रिटर्न दे रहा है.सोने का रिटर्न (Gold Return) शेयर, मयूचुअल फंड और बैंक एफडी आदि से ज्यादा ही रहा है. अक्षय तृतीया पर सोने को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर आप अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्स और स्टेबल कर सकते हैं. इस समय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, इसलिए पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन जरूरी है. विंडमिल कैपिटल द्वारा किए गए एक शोध में सामने आया है कि वित्त वर्ष 2023 में फाइनेंशियल मार्केट्स में अस्थिरता रहने की वजह से से निवेशक सोने की ओर खूब आकर्षित हुए.सालभर में 10 हजार रुपये चढ़ा भाव , एक रिपोर्ट के अनुसार, विंडमिल कैपिटल का कहना है कि आगे भी इक्विटी मार्केट के अस्थिर रहने की आशंका है. ऐसा महंगाई बढ़ने और मंदी की आशंकाओं की वजह से हो सकता इसलिए सोना आगे भी निवेश के लिए पसंदीदा टूल बना रहेगा. आमतौर पर सोने का इस्तेमाल महंगाई और शेयर बाजार की गिरावट में अपने पैसे को बचाने के लिए किया जाता है. भारतीय वायदा बाजार में पिछले एक साल में सोने में जोरदार तेजी करीब एक साल पहले 3 मई, 2022 को भाव एमसीएक्स (MCX Gold Rate) पर प्रति 10 ग्राम 50,800 रुपये था. वहीं, इसी 13 अप्रैल, 2023 को सोना 60,800 रुपये के स्तर को छू गया।भारतीय सर्राफा बाजार में 19 अप्रैल, 2023 को सोने की कीमत 59,940 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. वहीं, साल 2011 में सोने का भाव 26,350 रुपये था. इस तरह पिछले 12 वर्षों में ही इसका रेट दोगुने से ज्यादा हो चुका है.